
हरिद्वार –आजकल पितृपक्ष चल रहा है और पितृपक्ष में धर्मनगरी हरिद्वार का विशेष महत्व है।हरिद्वार में नारायणी शिला और कुशावर्त घाट का पितृ कार्य में विशेष महत्व बताया गया है।

हरिद्वार का कुशावर्त घाट भी इसके लिए विशेष महत्व रखता है।ऐसा कहा जाता है कि भगवान श्रीराम ने भी कुशावर्त पर अपने पिता दशरथ का श्राद्ध किया था।
देश में जिन तीन पितृ तर्पण स्थलों का महत्व है उनमें से एक नारायणी शिला हरिद्वार के मायापुर में स्थित हैं। दो अन्य गया जी व बद्रीनाथ हैं।यह तीनों स्थल भगवान विष्णु के स्थल हैं । जहां श्रद्धालु नारायण का पूजन कर अपने पूर्वजों को तर्पण व श्राद्ध अर्पित करते हैं। मान्यता है कि नारायणी शिला पर पूजन करने से पितरों की आत्मा को तृप्ति मिलती है यदि पितृ दोष है तो वह शांत है। जब वंशज तर्पण और पिंडदान अर्पित करते हैं तो पितृ प्रसन्न होकर उन्हें आशीर्वाद देते हैं। गया जी में यदि श्राद्ध कर दिया जाता है तो माना जाता है कि फिर हर वर्ष पितृपक्ष में श्राद्ध करना जरूरी नहीं होता।

